18 पुराण के नाम, श्लोक संख्या और हर पुराण का सार (सरल हिंदी में)
सभी 18 महापुराणों के नाम, उन्हें याद रखने का श्लोक, हर पुराण की श्लोक संख्या और हर पुराण में क्या है, सब कुछ सरल हिंदी में एक जगह।
वेदों का ज्ञान गहरा है, लेकिन आम लोगों तक धर्म, भक्ति और जीवन की सीख कथाओं के रूप में पुराणों के ज़रिए पहुँची। परंपरा के अनुसार पुराणों की रचना महर्षि वेदव्यास ने की। मुख्य पुराण 18 हैं, जिन्हें महापुराण कहते हैं।
इस लेख में आप जानेंगे कि 18 पुराण कौन-कौन से हैं, उन्हें आसानी से कैसे याद रखें, और हर पुराण में मुख्य रूप से क्या बताया गया है।
पुराण किसे कहते हैं?
"पुराण" का अर्थ है "जो प्राचीन होकर भी नया रहे"। पुराणों में सृष्टि की उत्पत्ति, देवताओं और अवतारों की कथाएँ, राजवंशों का इतिहास, तीर्थ, व्रत और धर्म के नियम बताए गए हैं।
परंपरा में पुराण के पाँच लक्षण माने गए हैं:
सर्गश्च प्रतिसर्गश्च वंशो मन्वन्तराणि च।
वंशानुचरितं चैव पुराणं पञ्चलक्षणम्॥
सरल अर्थ: सृष्टि की रचना (सर्ग), प्रलय और फिर से रचना (प्रतिसर्ग), देवताओं और ऋषियों के वंश (वंश), मनुओं के युग (मन्वन्तर) और राजवंशों का इतिहास (वंशानुचरित), ये पाँच बातें जिसमें हों, वही पुराण है।
18 पुराण याद रखने का आसान श्लोक
देवी भागवत में एक प्रसिद्ध श्लोक है, जिसमें पुराणों के नाम के पहले अक्षरों से सभी 18 पुराण याद हो जाते हैं:
मद्वयं भद्वयं चैव ब्रत्रयं वचतुष्टयम्।
अनापलिङ्गकूस्कानि पुराणानि पृथक् पृथक्॥
सरल अर्थ: "म" से दो (मत्स्य, मार्कण्डेय), "भ" से दो (भविष्य, भागवत), "ब्र" से तीन (ब्रह्म, ब्रह्माण्ड, ब्रह्मवैवर्त), "व" से चार (विष्णु, वायु, वराह, वामन), और फिर "अ" से अग्नि, "ना" से नारद, "प" से पद्म, "लिङ्ग" से लिंग, "ग" से गरुड़, "कू" से कूर्म और "स्क" से स्कन्द पुराण।
ध्यान दें: कुछ सूचियों में वायु पुराण की जगह शिव पुराण गिना जाता है। दोनों ही शिव-महिमा से जुड़े हैं, इसलिए परंपरा में दोनों मत मिलते हैं।
18 पुराणों की सूची और श्लोक संख्या
नीचे दी गई श्लोक संख्या परंपरा में बताई गई संख्या है (श्रीमद्भागवत के अनुसार)। अलग-अलग ग्रंथों और संस्करणों में इसमें थोड़ा अंतर मिलता है।
- ब्रह्म पुराण – लगभग 10,000 श्लोक
- पद्म पुराण – लगभग 55,000 श्लोक
- विष्णु पुराण – लगभग 23,000 श्लोक
- शिव पुराण (या वायु पुराण) – लगभग 24,000 श्लोक
- श्रीमद्भागवत पुराण – लगभग 18,000 श्लोक
- नारद पुराण – लगभग 25,000 श्लोक
- मार्कण्डेय पुराण – लगभग 9,000 श्लोक
- अग्नि पुराण – लगभग 15,400 श्लोक
- भविष्य पुराण – लगभग 14,500 श्लोक
- ब्रह्मवैवर्त पुराण – लगभग 18,000 श्लोक
- लिंग पुराण – लगभग 11,000 श्लोक
- वराह पुराण – लगभग 24,000 श्लोक
- स्कन्द पुराण – लगभग 81,100 श्लोक (सबसे बड़ा)
- वामन पुराण – लगभग 10,000 श्लोक
- कूर्म पुराण – लगभग 17,000 श्लोक
- मत्स्य पुराण – लगभग 14,000 श्लोक
- गरुड़ पुराण – लगभग 19,000 श्लोक
- ब्रह्माण्ड पुराण – लगभग 12,000 श्लोक
सभी 18 पुराणों को मिलाकर लगभग 4 लाख श्लोक माने जाते हैं।
हर पुराण का सार
1. ब्रह्म पुराण
इसे "आदि पुराण" भी कहा जाता है। इसमें सृष्टि की रचना, सूर्यवंश और चंद्रवंश की कथाएँ, और ओडिशा के पुरुषोत्तम क्षेत्र (जगन्नाथ पुरी) सहित कई तीर्थों का वर्णन है।
2. पद्म पुराण
यह बड़े पुराणों में से एक है और कई खंडों में बँटा है। इसमें तुलसी की महिमा, एकादशी व्रत की कथाएँ और गीता-माहात्म्य जैसे भक्ति से जुड़े विषय मिलते हैं।
3. विष्णु पुराण
इसमें महर्षि पराशर अपने शिष्य मैत्रेय को ज्ञान देते हैं। भक्त ध्रुव और प्रह्लाद की कथाएँ, भगवान विष्णु के अवतार और श्रीकृष्ण का चरित्र इसमें विस्तार से है।
4. शिव पुराण
भगवान शिव की महिमा, शिव-पार्वती विवाह, गणेश और कार्तिकेय के जन्म की कथाएँ, और 12 ज्योतिर्लिंगों का वर्णन इसी पुराण में मिलता है।
5. श्रीमद्भागवत पुराण
सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला पुराण। इसमें शुकदेव जी राजा परीक्षित को कथा सुनाते हैं। इसके 12 स्कंध हैं और दशम स्कंध में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का सुंदर वर्णन है। भागवत सप्ताह कथा इसी पुराण की होती है।
6. नारद पुराण
इसमें देवर्षि नारद धर्म, भक्ति और वेदांगों की बातें बताते हैं। इसकी एक खास बात यह है कि इसमें बाकी सभी पुराणों की विषय-सूची भी दी गई है।
7. मार्कण्डेय पुराण
प्रसिद्ध दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) इसी पुराण का हिस्सा है, जिसका नवरात्रि में पाठ होता है। राजा हरिश्चंद्र की सत्य-निष्ठा की कथा भी इसमें है।
8. अग्नि पुराण
इसे पुराणों का "विश्वकोश" कहा जाता है। अग्निदेव ने महर्षि वशिष्ठ को यह ज्ञान दिया। इसमें अवतार-कथाओं के साथ आयुर्वेद, ज्योतिष, वास्तु, व्याकरण और धनुर्वेद जैसे अनेक विषय हैं।
9. भविष्य पुराण
इसमें व्रत-कथाएँ, सूर्य उपासना और आने वाले युगों के बारे में वर्णन है। विद्वानों का मत है कि इसके कुछ हिस्से बाद के समय में जोड़े गए।
10. ब्रह्मवैवर्त पुराण
राधा-कृष्ण की लीलाओं और गोलोक धाम का विस्तार से वर्णन इसी पुराण में है। इसमें प्रकृति (देवी) और गणेश जी से जुड़े खंड भी हैं।
11. लिंग पुराण
शिवलिंग का महत्व और उसकी उत्पत्ति की कथा इसमें है, जब ब्रह्मा और विष्णु के सामने एक अनंत ज्योति-स्तंभ प्रकट हुआ था।
12. वराह पुराण
भगवान के वराह अवतार ने पृथ्वी देवी को यह ज्ञान दिया। इसमें व्रत, पूजा-विधि और मथुरा सहित कई तीर्थों का माहात्म्य है।
13. स्कन्द पुराण
सबसे बड़ा पुराण। इसका नाम भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) पर है। इसमें काशी, केदार, अवंतिका जैसे तीर्थों के अलग-अलग खंड हैं। प्रसिद्ध सत्यनारायण व्रत कथा परंपरा से इसी पुराण के रेवा खंड से जुड़ी मानी जाती है।
14. वामन पुराण
भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि की कथा इसका मुख्य विषय है। इसमें शिव-पार्वती से जुड़ी कथाएँ भी हैं।
15. कूर्म पुराण
समुद्र मंथन के समय कूर्म (कछुआ) अवतार में भगवान विष्णु ने यह ज्ञान दिया। इसमें "ईश्वर गीता" भी है, जिसमें शिव और विष्णु की एकता की बात है।
16. मत्स्य पुराण
मत्स्य अवतार ने प्रलय के समय राजा मनु को यह ज्ञान दिया। इसमें राजधर्म, तीर्थ और मंदिर-निर्माण (वास्तु) से जुड़ी बातें भी हैं।
17. गरुड़ पुराण
भगवान विष्णु ने अपने वाहन गरुड़ को यह ज्ञान दिया। इसका प्रेत खंड मृत्यु के बाद की यात्रा के बारे में है, इसलिए परिवार में किसी के निधन के बाद इसका पाठ करने की परंपरा है। इसमें आयुर्वेद और रत्नों का ज्ञान भी है।
18. ब्रह्माण्ड पुराण
इसमें पूरे ब्रह्माण्ड की रचना और लोकों का वर्णन है। परंपरा के अनुसार ललिता सहस्रनाम और अध्यात्म रामायण इसी पुराण से जुड़े माने जाते हैं।
पुराण पढ़ना कहाँ से शुरू करें?
- भक्ति के लिए: श्रीमद्भागवत पुराण से शुरू करें।
- शिव भक्त हैं तो: शिव पुराण पढ़ें।
- देवी उपासना के लिए: मार्कण्डेय पुराण की दुर्गा सप्तशती।
- ज्ञान और विविध विषयों के लिए: अग्नि पुराण और विष्णु पुराण।
पूरे पुराण बहुत बड़े हैं, इसलिए शुरुआत में सार या कथाओं के रूप में पढ़ना आसान रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सबसे बड़ा पुराण कौन सा है?
स्कन्द पुराण, जिसमें लगभग 81,100 श्लोक माने जाते हैं।
सबसे छोटा पुराण कौन सा है?
परंपरागत गिनती के अनुसार मार्कण्डेय पुराण, जिसमें लगभग 9,000 श्लोक हैं।
पुराण किसने लिखे?
परंपरा के अनुसार सभी 18 महापुराणों की रचना महर्षि वेदव्यास ने की और सूत जी ने इन्हें ऋषियों को सुनाया।
क्या उपपुराण भी होते हैं?
हाँ। 18 महापुराणों के अलावा 18 उपपुराण भी माने जाते हैं, जैसे नरसिंह पुराण और कल्कि पुराण। अलग-अलग ग्रंथों में उपपुराणों की सूची थोड़ी अलग मिलती है।
गरुड़ पुराण घर में पढ़ सकते हैं?
गरुड़ पुराण का आचार खंड (ज्ञान वाला हिस्सा) कोई भी पढ़ सकता है। प्रेत खंड का पाठ परंपरा से मृत्यु के बाद के दिनों में किया जाता है।
सार
18 पुराण भारतीय संस्कृति का विशाल खज़ाना हैं। इनमें सृष्टि की कहानी भी है, भक्ति की राह भी और जीवन जीने के नियम भी। एक-एक पुराण का सार समझ लें, तो सनातन धर्म की पूरी तस्वीर साफ़ होने लगती है।