सर्वे भवन्तु सुखिनः का अर्थ: सबके सुख की प्रार्थना (सरल अर्थ)

"सर्वे भवन्तु सुखिनः" शांति-प्रार्थना का संस्कृत पाठ, शब्दार्थ, सरल हिंदी अर्थ और रोज़ की ज़िंदगी में इसे अपनाने के आसान तरीके। जानिए सबके कल्याण की इस प्रार्थना का भाव।

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"सब सुखी हों।" इतनी छोटी और इतनी विशाल सोच वाली पंक्तियाँ कम ही मिलती हैं। बहुत से लोग इसे मंदिरों, स्कूल की प्रार्थना सभाओं, योग कक्षाओं और घर की पूजा में सुनते आए हैं। यह प्रार्थना सिर्फ़ अपने लिए कुछ नहीं माँगती। यह सबके लिए माँगती है।

नीचे प्रार्थना, उसका सरल अर्थ और उसे रोज़ जीने के कुछ विचार दिए हैं।

प्रार्थना

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥

सब सुखी हों। सब रोग-रहित रहें। सब शुभ और कल्याणकारी बातें देखें। कोई भी दुख का भागी न बने।

यह एक पारंपरिक शांति-प्रार्थना है, जो अक्सर प्रार्थनाओं और अनुष्ठानों के अंत में बोली जाती है और भारत के कई हिस्सों में गाई या जपी जाती है।

शब्दार्थ

  • सर्वे: सब, सभी
  • भवन्तु: हों
  • सुखिनः: सुखी
  • सन्तु: रहें, हों
  • निरामयाः: रोग-रहित, स्वस्थ
  • भद्राणि: शुभ और अच्छी बातें
  • पश्यन्तु: देखें
  • मा: न
  • कश्चित्: कोई भी
  • दुःखभाक्: दुख का भागी
  • भवेत्: बने, हो

प्रार्थना के पीछे का भाव

इस प्रार्थना में चार छोटी कामनाएँ हैं, हर पंक्ति में एक:

  • सबको सुख: सिर्फ़ मेरे परिवार, मेरे शहर या मेरे देश को नहीं।
  • सबको स्वास्थ्य: "निरामय" का अर्थ है रोग के बिना, तन और मन से सहज।
  • शुभ देखना: "भद्र" यानी शुभ और अच्छा। अच्छा "देखने" का अर्थ है अपने आसपास की भलाई और अच्छा करने के अवसरों को पहचानना।
  • कोई दुखी न हो: अंत में कामना है कि किसी को भी दुख न उठाना पड़े।

ध्यान दीजिए कि हर पंक्ति "सब" या "कोई नहीं" से शुरू होती है। इसमें "मैं" नहीं है, और "हम बनाम वे" भी नहीं।

आम गलतफहमियाँ

  1. "यह सिर्फ़ एक रटा हुआ पाठ है।" यह वह भी हो सकता है, पर इसके शब्द दूसरों को देखने का एक तरीका भी हैं। पाठ करना अच्छी शुरुआत है, और इसे जीना असली प्रार्थना है।
  2. "बस कामना कर लेना काफ़ी है।" दूसरों के लिए की गई प्रार्थना तब मज़बूत होती है जब उसके साथ छोटे कर्म भी जुड़ें: किसी की मदद करना, मीठा बोलना, जो है उसे बाँटना।
  3. "इसका मतलब अपनी ज़रूरतें भूल जाना है।" "सर्वे" यानी सब, और उसमें आप भी हैं। अपने स्वास्थ्य और मन की शांति का ध्यान रखना भी इस कामना का हिस्सा है।
  4. "यह गलत को अनदेखा करना सिखाती है।" प्रार्थना सबका भला चाहती है, पर नुकसान सह लेने को नहीं कहती। हम किसी का भला चाहते हुए भी गलत बात को "ना" कह सकते हैं।

रोज़ की ज़िंदगी में कैसे अपनाएँ

  • सुबह: चारों पंक्तियाँ धीरे-धीरे एक बार बोलिए, और किसी एक ऐसे व्यक्ति को याद कीजिए जो कठिन समय से गुज़र रहा है।
  • भोजन से पहले: एक पल रुककर उन सबको याद कीजिए जिनके पास आज भोजन नहीं है। फिर कृतज्ञता से खाइए।
  • किसी पर गुस्सा आए तो: मन ही मन ये पंक्तियाँ दोहराइए। इनसे समस्या हल नहीं होगी, पर बोलने से पहले आवाज़ नरम हो सकती है।
  • बच्चों के साथ: प्रार्थना के साथ उसका अर्थ भी सिखाइए। पूछिए, "आज हम किसी को खुश करने के लिए क्या कर सकते हैं?" और उन्हें कोई छोटा काम चुनने दीजिए।
  • कठिन समय में: जब अपनी चिंताएँ भारी लगें, तब दूसरों के स्वास्थ्य और शांति की कामना याद दिलाती है कि आप अकेले नहीं हैं।

शाम के लिए एक सरल अभ्यास: सोने से पहले तीन गहरी साँसें लीजिए, प्रार्थना दोहराइए और उस दिन की एक अच्छी बात याद कीजिए, जो आपने की या देखी।

और पढ़ें सरल हिंदी में

इस प्रार्थना का भाव, सबकी चिंता और दुनिया में अच्छाई देखना, गीता और कई अन्य ग्रंथों में भी मिलता है। अगर आप उन्हें सरल भाषा में पढ़ना चाहते हैं, तो सात्विक सेतु हिंदी बंडल में 14 ग्रंथ और 2 बोनस हैं, सरल हिंदी में, जिसमें गीता के सभी 700 श्लोक भी हैं। पहले मुफ़्त सैंपल पढ़कर देख सकते हैं: गीता अध्याय 12 मुफ़्त सैंपल (PDF)।

संक्षेप में

"सर्वे भवन्तु सुखिनः" सबके लिए सुख, स्वास्थ्य, शुभ और दुख से मुक्ति की कामना है। यह छोटी प्रार्थना दुनिया को देखने का एक विशाल और दयालु नज़रिया सिखाती है, और शब्दों के साथ छोटे-छोटे दयालु कर्म जुड़ने पर सबसे अर्थपूर्ण बनती है।

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